Monday, 30 March 2020
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Sunday, 29 March 2020
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CDMA, GSM, LTE और GPS क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
CDMA : सीडीएमए (Code Division Multiple Access) टेक्नोलॉजी बेसिक टेक्नोलॉजी है जो US में ज्यादा इस्तेमाल होती है। CDMA अन्य नेटवर्क में कम इंटरफेस करता है और इसमें कई यूजर एक साथ बात कर सकते हैं, जो एक ही फ्रीक्वेंसी को शेयर करते हों। यह अतिरिक्त सिग्नल नॉइस को कम करने के लिए ज्यादा पावर लेता है, जिससे बैटरी लाइफ कम हो जाती है। CDMA हैंडसेट अक्सर एक ही कैरियर के लिए लॉक होता है और यह ट्रांसफर नहीं हो सकता।
GSM : जीएसएम (Global System for Mobile communication) यह डिजिटल मोबाइल टेलीफोन सिस्टम है, जो यूरोप और दुनिया के अन्य भागों में इस्तेमाल की जाती है। GSM फोन अनलॉक कर सकते हैं और यह एक कैरियर से दूसरे कैरियर में ट्रांसफर हो सकता है। 2G सेलुलर नेटवर्क कमर्शियली GSM स्टैंडर्ड पर लॉन्च हुआ है और इसकी ट्रांसफर स्पीड अधिकतम 50 kbit/s है।
LTE : एलटीई (Long-Term Evolution) 4G वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी है जिसे Third Generation Partnership Project (3GPP) ने डेवलप किया है। 4G LTE को मोबाइल फोन और डेटा टर्मिनल के लिए हाई स्पीड डेटा का स्टैंडर्ड वायरलेस कम्युनिकेशन है। इसकी अधिकतम डाउनलोड स्पीड 299.6 Mbit/s और अपलोड स्पीड 75.4 Mbit/s है जो मोबाइल के इक्विपमेंट कैटेगरी पर आधारित होती है।
GPS : GPS सर्विस एक सैटेलाइट बेस्ड सर्विस है जो डिवाइस की लोकेशन, पोजिशन और स्थान के साथ मौसम की जानकारी आदि देती है। इसे सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। जब कोई मुसीबत में हो तो GPS से उस व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।
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कैपेसिटिव टचस्क्रीन LCD, OLED, AMOLED और सुपर AMOLE क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
कैपेसिटिव टचस्क्रीन LCD : कैपेसिटिव टचस्क्रीन मानव शरीर के इलेक्ट्रिकल प्रॉपर्टीज के सेंसिंग से काम करता है। कैपेसिटिव टचस्क्रीन पैनल में इंडियम टिन ऑक्साइड के ट्रांसपैरेंट कंडक्टर होता है। ह्यूमन बॉडी में भी इलेक्ट्रिकल कंडक्टर होता है, जिससे स्क्रीन को टच करने सें इलेक्ट्रोस्टेटिक फील्ड रिस्टोर हो जाता है और वह प्वाइंट इन्सट्रक्शन के रूप में लिए जाता है। कैपेसिटिव टचस्क्रीन, रेजिस्टिव टचस्क्रीन से काफी बेहतर है।
OLED : OLED का मतलब Organic Light-Emitting Diode है। OLED में ऑर्गेनिक पॉलिमर के छोटे डॉट्स होते हैं, जो इलेक्ट्रिसिटी से चार्ज होने के बाद लाइट को डेवलप करते हैं। OLED नइ डिस्प्ले टेक्नोलॉजी है, जो LCD के मुकाबले कम पावर लेती है और यह पतली, हल्की, बेहतर व्यूइंग एंगल और वीडियो और एनिमेशन के लिए अच्छा रिस्पांस टाइम है। ओएलईडी स्क्रीन में खुद एलईडी ही पिक्सल का काम करती हैं और 6 लेयर्स मिलकर तस्वीरें स्क्रीन पर लाती हैं। इसलिए ओएलईडी टीवी पर तस्वीर ज्यादा स्पष्ट दिखती है और किसी भी एंगल से देखने पर एक सा दिखाई देता है। साथ ही ओएलईडी स्क्रीन वाले गैजेट्स काफी पतले और हल्के होते हैं।
AMOLED : AMOLED एक्टिव मैट्रिक्स ऑर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड है। यह मोबाइल फोन और टीवी के लिए नेक्स्ट जनरेशन डिस्प्ले टेक्निक है। यह एलसीडी की तुलना में रिच कलर, शार्पर इमेज, कम पॉवर कन्जूमशन और अधिक पतली और हल्की है।
सुपर AMOLED : सुपर AMOLED को पारंपरिक AMOLED के मुकाबले बेहतर परफॉरमेंस हे लिए तैयार किया गया है। AMOLED की तुलना में सीधे धूप में देखे जाने पर सुपर AMOLED का परफॉरमेंस अच्छा है और यह ब्राइट इमेज को सपोर्ट करता है और पॉवर कम लगती है।
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डिस्प्ले रेजोल्यूशन क्या है और ये कितने टाइप का होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
रेजोल्यूशन : स्क्रीन की डिस्प्ले क्वालिटी (स्क्रीन क्वालिटी) या कैमरा की फोटो क्वालिटी आम तौर पर रेजोल्यूशन पर निर्भर करती है। जितना ज्यादा रेजोल्यूशन होगा, डिस्प्ले क्वालिटी उतनी ही बेहतर होगी। जैसे, HVGA (480x320), VGA (640x480), FWVGA (854x480), qHD (960x540 पिक्सल) जैसे रेजोल्यूशन वाले स्मार्टफोन का डिस्प्ले कमजोर होता है। 720*1280 पिक्सल (HD) के रेजोल्यूशन वाले स्मार्टफोन्स का डिस्प्ले बेहतर होता है। फुल एचडी (1920*1080 पिक्सल का रेजोल्यूशन) वाला फोन की डिस्प्ले क्वालिटी ज्यादा बेहतर होती है।
डिस्प्ले रेजोल्यूशन के टाइप
VGA (Video Graphics Array) - 640*480 पिक्स्ल
SVGA (Super Video Graphics Array) - 800*600 पिक्स्ल
QVGA (Quarter Video Graphics Array) - 320*240 पिक्स्ल
WQVGA (Wide QVGA) - XXX*240 पिक्स्ल
HVGA (Half VGA) - 480*320 पिक्स्ल
WVGA (Wide VGA) - XXX*480 पिक्स्ल
FWVGA (Full Wide Video Graphics Array) - 854*480 पिक्स्ल
Quarter HD or qHD - 960*540 पिक्स्ल
XGA (Extended Graphics Array) - 1024*768 पिक्स्ल
SXGA (Super Extended Graphics Array) – 1080*1024 पिक्स्ल
WXGA (Wide Extended Graphics Array) - 1366*768 पिक्स्ल
HD (High Definition) – 1360*768 पिक्स्ल
HD+ (High Definition) – 1600*900 पिक्स्ल
Full HD (High Definition) - 1920*1080 पिक्स्ल
Hd ready (720*1280 पिक्स्ल)
Quad HD (1440*2560 पिक्स्ल)
Ultra HD 4K (3840*2160 पिक्स्ल)
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स्मार्टफोन प्रोसेसर की क्लॉक-स्पीड क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
क्लॉक-स्पीड : मोबाइल और कम्प्यूटर दोनों के लिए ही अब प्रोसेसर्स के विकल्प की भरमार है। कई बार एक ही नाम का प्रोसेसर अलग-अलग स्पीड देता है। ऐसा क्लॉक स्पीड की वजह से होता है। यह इस बात का माप होता है कि कोई भी प्रोसेसर एक साइकिल (एक सेकंड) के दौरान कितने ऑपरेशन पूरे कर सकता है। चूंकि नए जमाने के प्रोसेसर एक सेकंड में लाखों क्लॉक साइकिल पूरे कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आमतौर पर गीगाहर्ट्स या मेगाहर्ट्ज में मापा जाता है। प्रोसेसर की ओवरऑल परफॉर्मेंस क्लॉक स्पीड पर भी निर्भर करती है। यानी प्रोसेसर में बाकी कंपोनेंट अच्छे हैं, लेकिन उसकी क्लॉक स्पीड कम है, तो वह धीमा काम करेगा। इसलिए मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर खरीदते समय उसके प्रोसेसर की क्लॉक स्पीड की जानकारी भी लेनी चाहिए।
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एंड्रॉयड की एन्क्रिप्शन सेटिंग क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
एन्क्रिप्शन : आपके स्मार्टफोन की सेटिंग्स में ‘Encrypt your data' या एनक्रिप्शन से जुड़े अन्य विकल्प उपलब्ध होते हैं। कम्प्यूटर में भी इस तरह की सुविधा होती है। एनक्रिप्शन या अपने डाटा को ‘एनक्रिप्टेड’ फॉर्म में बदलना। यह एक ऐसा तरीका होता है, जिसमें आप से जुड़ी संवेदशनशील या निजी जानकारियों की फाइल्स को सिस्टम ऐसी फाइल्स में बदल देता है और पासवर्ड, प्राइवेट की या अन्य तरीकों से सुरक्षित कर देता है। इसके बाद आपके अलावा अगर कोई इन फाइल्स को देखने की कोशिश करता है, तो उसे अजीब आकृतियां और उल्टे-सीधे शब्द नजर आते हैं। इसके बाद फाइल को पासवर्ड के जरिए डिक्रिप्ट करके ही देखा जा सकता है। यह अपनी निजी या संवेदनशील फाइल्स को और भी ज्यादा सुरक्षित बनाने का कारगर तरीका होता है। इससे फाइल सिस्टम (मोबाइल या कम्प्यूटर) की सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर नहीं रहती।
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यूएसबी टाइप-सी, एमएएच और 4के रेजोल्यूशन क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
USB Type-C : इस पोर्ट की मदद से सभी केबल एक ही पोर्ट में कनेक्ट किए जा सकते हैं। इसके लिए अलग-अलग पोर्ट्स किसी डिवाइस में देने की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब चाहे की बोर्ड की पिन लगानी हो या माउस या फिर चार्जर अटैच करना हो, सब एक ही पोर्ट से हो जाएगा। इसके अलावा, इस पोर्ट में चाहे केबल उलटा लगाया जाए या सीधा केबल लग जाएगा।
mAh : ये किसी डिवाइस की बैटरी के चार्ज पावर को दर्शाता है। आसान शब्दों में कहा जाए तो एक बैटरी में कितनी इलेक्ट्रिकल चार्ज पावर है, ये mAh से पता चलता है। ये आंकड़ा जितना ज्यादा होगा, उतनी ही डिवाइस को ज्यादा पावर मिलेगी और बैटरी लंबे समय तक काम करेगी।
4K : 4K डिस्प्ले क्वालिटी का मतलब है HD से 8 गुना बेहतर डिस्प्ले क्वालिटी वाला डिवाइस। 4K उस डिस्प्ले रेजोल्यूशन को कहा जाता है जिसमें 4000 पिक्सल होते हैं। इसे आम तौर पर अल्ट्रा हाई डेफिनेशन टेलीविजन भी कहा जाता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो ये अभी कमर्शियल टीवी में सबसे बेस्ट क्वालिटी में से एक है।
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जाइरोस्कोप, एक्सेलोमीटर, प्रोक्सिमिटी सेंसर और लाइट एम्बिएंट सेंसर क्या होते हैं?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
जाइरोस्कोप : इसका इस्तेमाल मोबाइल गेम खेलने में किया जाता है। जब हम रेसिंग गेम खेलते हैं और कार को दाएं या बाएं मोड़ने के लिए मोबाइल फोन को भी दाएं या बाएं घुमाते हैं, तब ऐसा इसी सेंसर की वजह से होता है।
एक्सेलोमीटर : मोबाइल की स्क्रीन को पोर्टेट या लैंडस्कैप में करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल को हम जिस भी दिशा में घुमाते हैं, ठीक उसी दिशा में मोबाइल की स्क्रीन भी घुम जाती है। मोबाइल में 'ऑटो रोटेड' सेटिंग इसी पर काम करती है। इसका इस्तेमाल इमेज-रोटेशन में भी किया जाता है।
प्रोक्सिमिटी सेंसर : कई बार होता है कि हम फोन को कान पर लगाकर किसी से बात कर रहे होते हैं और तभी हमारा कान मोबाइल के टचस्क्रीन को छू लेता है और इस वजह से फोन कट जाता है या फिर कोई ऐप चालू हो जाता है। कॉल के दौरान ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए प्रोक्सिमिटी सेंसर का उपयोग किया जाता है। प्रोक्सिमिटी सेंसर आपके फोन और उसके सामने की वस्तु के बीच की दूरी की पहचानकर स्क्रीन को इनएक्टिव कर देता है।
लाइट एम्बिएंट सेंसर : मोबाइल फोन की ब्राइटनेस को सेट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। जब हम किसी डिवाइस में ब्राइटनेस सेटिंग को 'ऑटो' मोड में सेट करते हैं तब वह डिवाइस हमारे आस-पास मौजूद लाइट के हिसाब से मोबाइल स्क्रीन की ब्राइटनेस को सेट करता है ताकि मोबाइल स्क्रीन पर देखने में आंखों को कोई परेशानी ना हो।
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कैश मेमोरी, हॉटस्पॉट और बास क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
कैश मेमोरी : ये डिवाइस मेमोरी में एक ऐसी जगह होती है जहां से हाल ही में एक्सेस किया गया डाटा आसानी से रिट्रीव किया जा सकता है। यूजर्स अपने डिवाइस पर जो भी काम करते हैं उसकी कॉपी कैश मेमोरी में भी सेव रहती है। मेन मेमोरी की जगह कैश मेमोरी से प्रोसेसर डाटा लेता है।
हॉटस्पॉट : वाई-फाई हॉटस्पॉट एक ऐसा फीचर होता है जिसके जरिए एक डिवाइस अपने इंटरनेट कनेक्शन को बाकी डिवाइसेस में वाई-फाई सिग्नल की मदद से भेज सकता है। ऐसे में अगर किसी एक डिवाइस में इंटरनेट है तो एक या एक से ज्यादा डिवाइसेस उससे कनेक्ट हो सकेंगे।
बास (BASS) : बास एक तरह का म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट होता है जो साउंड क्वालिटी को लो पिच रेंज (लो फ्रीक्वेंसी) देता है। इससे साउंड में धमक आती है। इससे म्यूजिक की क्वालिटी कई गुना बेहतर हो जाती है।
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जीपीआरएस, इन्फ्रारेड पोर्ट और एचडीएमआई क्या होता है?
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स से जुड़े ऐसे कई शब्द हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती। इनमें ज्यादातर शब्द तो हमारे द्वारा डेली इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन से जुड़े होते हैं। ऐसे में हम टेक गाइड की मदद से आपको इन शब्दों के मतलब समझा रहे हैं।
GPRS : इसका पूरा नाम जनरल पैकेट रेडियो सर्विस है। मोबाइल नेटवर्क के जरिए डाटा ट्रांसफर की तकनीक को GPRS कहा जाता है। इसे मोबाइल इंटरनेट कहते हैं जो आम सिम के जरिए काम करता है।
इन्फ्रारेड पोर्ट : इन्फ्रारेड पोर्ट की मदद से डिवाइस को रिमोट में बदला जा सकता है। इन्फ्रारेड सेंसर ही टीवी, DVD, AC आदि डिवाइसेस के रिमोट में लगे होते हैं। अगर किसी फोन में इन्फ्रारेड फीचर है, तो उसे होम अप्लायंस के रिमोट में बदला जा सकता है। इसके लिए गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐप्स उपलब्ध हैं।
HDMI : इसका पूरा नाम हाई-डेफिनेशन मल्टीमीडिया इंटरफेस है। डिजिटल ऑडियो और वीडियो ट्रांसफर करने के लिए HDMI पोर्ट और केबल का इस्तेमाल किया जाता है। अब ये पोर्ट सभी टेलीविजन में दिया जाता है।
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