Sunday, 17 February 2019

राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने की तैयारी!

क्या राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने की तैयारी है? लगता तो ऐसा ही है. कुछ दिनों पहले खेल मंत्रालय ने खेल पुरस्कार योजना और विशेष (नकद) पुरस्कार योजना की समीक्षा करने के लिए रिटायर्ड जस्टिस इंदरमीत कौर कोचर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया था. समिति में ओलिंपियन शिवा केशवन , अश्विनी नाचप्पा, राजेश कालरा (निदेशक/उपसचिव खेल मंत्रालय, खेल पुरस्कारों का प्रभारी) और मोहन दास पई. द ट्रिब्यून के अनुसार समिति गठित करने का उद्देश्य और छठे सदस्य के तौर पर मोहन दास पई को शामिल करने से ही इस बात को बल मिलने लगा था कि ये राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने के लिए सारी कवायद है. इन्फोसिस के पूर्व निदेशक मोहन दास पई को कांग्रेस के घोर विरोधी के रूप में जाना जाता है. हालांकि समिति को नाम तभी बदलना है अगर उसे उचित लगता है तो. ये भी पढ़ें- सीसीआई के बाद मोहाली स्टेडियम से हटाईं गईं पाकिस्तानी क्रिकेटर की तस्वीरें समिति को ये भी देखना है कि क्या पुरस्कार राशि को बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही एक साल में दिए जाने वाले पुरस्कारों की संख्या, चयन के लिए अंकों की पात्रता और इसका दायरा बढ़ाने के लिए नई अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं को शामिल किए जाने पर विचार किया जाएगा. खेल पुरस्कार योजना के तहत अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य, ध्यानचंद, राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद ट्रॉफी की भी समीक्षा की जाएगी. समिति को अपनी रिपोर्ट गठन के दस दिनों के भीतर देनी है. ये भी पढ़ें- पुलवामा अटैक के बाद शांति की अपील करने वाली सानिया क्यों हो गईं ट्रोल अगर राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदला जाता है तो ये पहली बार नहीं होगा कि मौजूदा सरकार किसी योजना से राजीव गांधी का नाम हटा रही है. इससे पहले 2016 में राजीव गांधी खेल अभियान के नाम बदल कर खेलो इंडिया कर दिया गया था. राजीव गांधी खेल अभियान का नाम भी किसी अन्य योजना के नाम पर रखा गया था. पिछली यूपीए सरकार ने पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान का नाम पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर रखा था.

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